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ताजपुर हत्याकांड का खुलासा: मुख्य आरोपी गिरफ्तार, साजिश का पर्दाफाश

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ताजपुर गोलीकांड का खुलासा: समस्तीपुर पुलिस की बड़ी सफलता, मुख्य शूटर गिरफ्तार; एसपी अरविंद प्रताप सिंह की सख्त मॉनिटरिंग से टूटी साजिश की कमर
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समस्तीपुर पुलिस ने ताजपुर थाना क्षेत्र के चर्चित गणेश सहनी हत्याकांड का त्वरित उद्भेदन करते हुए बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस अधीक्षक अरविंद प्रताप सिंह के सख्त निर्देश और लगातार फील्ड मॉनिटरिंग के कारण पुलिस टीम ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है तथा घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल भी बरामद कर ली गई है। इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि जिले में अपराध के खिलाफ एसपी की जीरो टॉलरेंस नीति पूरी तरह प्रभावी है।घटना 8 फरवरी 2026 को ताजपुर थाना क्षेत्र के हरपुर भिंडी स्थित दर्जनिया पुल के पास हुई थी, जहां मिर्जापुर निवासी आदर्श कुमार उर्फ गणेश सहनी की अज्ञात अपराधियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई थी और पुलिस पर शीघ्र खुलासा करने का भारी दबाव था। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी अरविंद प्रताप सिंह ने तुरंत अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सदर-1 संजय कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में विशेष जांच टीम का गठन किया और प्रशिक्षु सहायक पुलिस अधीक्षक अनिकेत कुमार द्विवेदी को छापेमारी का नेतृत्व सौंपा।तकनीकी और मानवीय सूचनाओं के आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दादनपुर निवासी अंकित कुमार को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार करते हुए बताया कि जमीन कारोबार में वर्चस्व और पुराने विवाद के कारण इस हत्या की साजिश रची गई थी। ताजपुर-बख्तियारपुर फोरलेन के किनारे तेजी से बढ़ रहे जमीन कारोबार में मृतक पहले एक ग्रुप के साथ काम करता था, लेकिन बाद में अलग होकर दूसरे समूह के साथ जुड़ गया था, जिससे पूर्व साथियों में गहरी दुश्मनी पैदा हो गई। इसी प्रतिशोध में हत्या की योजना बनाई गई थी।आरोपी ने यह भी खुलासा किया कि घटना में कई अन्य अपराधी शामिल थे, जिनमें रेक्की करने वाले, हथियार उपलब्ध कराने वाले और साजिशकर्ता भी शामिल हैं। पुलिस ने सभी की पहचान कर ली है और गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी जारी है। आरोपी की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त पल्सर मोटरसाइकिल भी बरामद कर ली गई है। सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क को खंगाला जा रहा है।इस पूरे ऑपरेशन की सफलता के पीछे पुलिस अधीक्षक अरविंद प्रताप सिंह की सक्रिय नेतृत्व शैली को मुख्य कारण माना जा रहा है। जिले में लगातार रात के समय खुद फील्ड में निकलकर अपराध नियंत्रण की रणनीति तैयार करने वाले एसपी की कार्यशैली का ही परिणाम है कि गंभीर हत्याकांड का खुलासा बेहद कम समय में संभव हो सका। पुलिस महकमे के अंदर भी इसे “क्विक रिस्पॉन्स मॉडल” के रूप में देखा जा रहा है।पुलिस सूत्रों के अनुसार गिरफ्तार आरोपी और उसके गिरोह द्वारा दो दिन बाद एक अन्य व्यक्ति की हत्या की भी साजिश रची जा रही थी, लेकिन समय रहते पुलिस की कार्रवाई से एक बड़ी वारदात टल गई। फिलहाल पुलिस पूरे गिरोह की गिरफ्तारी और हथियार बरामदगी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है। इस कार्रवाई से जिले में अपराधियों के बीच दहशत और आम लोगों में सुरक्षा का भरोसा मजबूत हुआ है। गौरतलब है कि,ताजपुर हत्याकांड का त्वरित खुलासा यह साबित करता है कि जब पुलिस नेतृत्व सक्रिय, सतर्क और परिणाम-केंद्रित होता है तो जटिल से जटिल अपराध भी ज्यादा समय तक रहस्य नहीं बने रहते। समस्तीपुर में हाल के दिनों में जिस तरह पुलिस अधीक्षक अरविंद प्रताप सिंह लगातार फील्ड में सक्रिय रहकर अपराध नियंत्रण की रणनीति को जमीन पर उतार रहे हैं, उसका असर साफ दिखाई दे रहा है। इस मामले में भी तकनीकी साक्ष्य, मानवीय सूचना और तेज कार्रवाई के संयोजन ने न केवल मुख्य आरोपी तक पुलिस को पहुंचाया, बल्कि पूरे साजिश तंत्र की परतें भी खोल दीं।
यह घटना एक और गंभीर सच्चाई उजागर करती है—तेजी से बढ़ते जमीन कारोबार के साथ आपराधिक प्रतिस्पर्धा और हिंसक रंजिश भी बढ़ रही है। ऐसे मामलों में केवल गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं होती, बल्कि संगठित अपराध के आर्थिक स्रोतों और नेटवर्क पर भी लगातार चोट जरूरी है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने निश्चित रूप से लोगों में भरोसा जगाया है, लेकिन दीर्घकालिक शांति के लिए प्रशासन, समाज और कानून व्यवस्था—तीनों की सतत साझेदारी ही स्थायी समाधान दे सकती है।

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